सिडनी स्थित बाथला समूह, जो कई वर्षों से आवासीय परियोजनाओं में प्रमुख रहा है, ने हाल ही में स्वैच्छिक प्रशासन का विकल्प चुना। कंपनी ने बताया कि बिक्री में गिरावट, केंद्र सरकार के मई बजट के प्रभाव और कच्चे माल की कीमतों में तेज़ी ने एक ‘परिपूर्ण तूफ़ान’ उत्पन्न किया। इस निर्णय से सिडनी और आसपास के क्षेत्रों में कई खरीदारों के निवेश पर सवाल उठे हैं, क्योंकि कई परियोजनाएँ अभी भी अधूरी हैं और भुगतान किए गए धन की वापसी अनिश्चित है।
ऑस्ट्रेलिया के आवास निर्माण क्षेत्र में यह नई नहीं है; पिछले कुछ महीनों में कई बड़े बिल्डरों को समान आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ा। उदाहरण के तौर पर, सिडनी के जगन्नाथ मंदिर ने हाल ही में प्रथम स्नान यात्रा और हाटी भेषा का आयोजन किया, जिससे ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर को विदेश में उजागर किया गया, जबकि उसी समय निर्माण क्षेत्र में वित्तीय संकट बढ़ रहा था। इसी प्रकार, गुजरात के भरुच और कर्नाटक के मंगलूर में दीवार गिरने की घटनाएँ भी निर्माण सुरक्षा और नियामक निगरानी की कमी को उजागर करती हैं। इन घटनाओं ने बाथला समूह की स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे माल की कीमतों में निरंतर वृद्धि, श्रमिकों की कमी और स्थिर मूल्य अनुबंधों ने कई रियल एस्टेट कंपनियों को असहाय बना दिया है। बाथला समूह के ग्राहकों को अब कानूनी उपायों और पुनर्संरचना की संभावनाओं का सहारा लेना पड़ेगा। सरकार को भी इस संकट को कम करने के लिए नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे ‘परिपूर्ण तूफ़ान’ से बचा जा सके और घर खरीदारों का विश्वास पुनः स्थापित हो सके।

