सिडनी के टाउन हॉल में ९ फरवरी को इज़राइल के राष्ट्रपति इसाक हरोज़ के दौरे के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान एक पुरुष पुलिस अधिकारी ने कैमरे के सामने अपने सहयोगियों को बताया कि उसने एक विरोधी को गिरते ही सिर से मार दिया। वह कहता है, “मैंने उसे ज़ोर से मार दिया” और इस बात को गर्व से प्रस्तुत करता है। इस प्रकार की अभिव्यक्ति ने न केवल स्थानीय जनता को बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गुस्सा और चिंता उत्पन्न की, क्योंकि यह पुलिस के पेशेवर आचरण के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।
यह घटना पिछले कुछ हफ्तों में भारत में पुलिस के दुरुपयोग से जुड़ी कई घटनाओं की श्रृंखला में एक नई कड़ी बनती है। हैदराबाद‑वारंगल राजमार्ग पर एक परिवार को मोटरसाइकिल सवारों द्वारा पीछा करने की घटना, लखनऊ में फायर अधिकारी के खिलाफ झूठे आरोपों को वापस लेना, तथा तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को जबरन खींचने वाले उप निरीक्षक पर सवाल उठाना—all these incidents have highlighted a pattern of misconduct and lack of accountability among law‑enforcement agencies. इन सभी घटनाओं ने सार्वजनिक भरोसे को कमजोर किया है और सुधार की मांग को तेज़ किया है।
अब सवाल यह है कि इस प्रकार के व्यवहार को रोकने के लिए कौन से कदम उठाए जाएंगे। पुलिस विभाग को चाहिए कि वह इस वीडियो को पूरी तरह से जांचे, जिम्मेदार अधिकारी को कड़ी सजा दिलाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा‑निर्देश स्थापित करे। साथ ही, नागरिक समाज को भी इस मुद्दे पर सतर्क रहना चाहिए और पुलिस के अनुशासन में पारदर्शिता की माँग करनी चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

