सीजेपी का 'स्कूल ठीक करो' अभियान सरकारी विद्यालयों में बुनियादी ढांचे की कमी, कक्षाओं की भीड़भाड़ और शैक्षणिक संसाधनों की अनुपलब्धता को उजागर करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में टीमों ने स्कूलों का निरीक्षण किया और समस्याओं को सार्वजनिक किया। महाराष्ट्र के लातूर जिले में एक स्कूल दौरे के दौरान अभिजीत दीपके सहित कई सदस्यों पर दबाव बनाने और अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगा, जिससे स्थानीय पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया।

इसी बीच राजस्थान के जयपुर में सीजेपी टीम को स्कूल निरीक्षण के दौरान स्थानीय युवाओं द्वारा हमला किया गया, जिसके बाद टीम ने प्रतिवादी पक्ष पर भी एफआईआर दायर की। यह प्रतिकूल प्रतिक्रिया राज्य में सामाजिक तनाव को दर्शाती है, जहाँ पिछले दिनों दरगाह पर धर्मांतरण के दबाव के आरोप, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की नागपुर यात्रा और मुंबई में प्री‑मॉनसून बारिश जैसी घटनाओं ने सार्वजनिक भावना को तीव्र कर दिया था। इन घटनाओं ने प्रशासनिक कार्यवाही और सुरक्षा उपायों को और जटिल बना दिया।

इन सभी घटनाओं के प्रकाश में यह स्पष्ट है कि सीजेपी का शैक्षिक सुधार अभियान केवल शैक्षणिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह सामाजिक‑राजनीतिक परिदृश्य में भी गहराई से जुड़ गया है। सरकार को अब न केवल स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को सुधारने की आवश्यकता है, बल्कि विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संवाद स्थापित कर तनाव को कम करने के उपाय भी अपनाने चाहिए। ऐसा करने से ही शैक्षिक सुधार की दिशा में स्थायी प्रगति संभव होगी।