सेन्थिलबालाजी ने तास्मैक अनियमितताओं के मामले में ड्रग वैरिएंस एंटी‑कॉरप्शन (डीवीएसी) के कार्यालय में उपस्थित होकर विस्तृत बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस जांच का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना और संभावित भ्रष्टाचार को उजागर करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी प्रकार की अनियमितता में भाग नहीं लिया और सभी प्रक्रियाओं का पालन किया।
पूछताछ के बाद सेन्थिलबालाजी ने शासक दल को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई ठोस सबूत है तो उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा, "यदि आपके पास भ्रष्टाचार का प्रमाण है तो कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि केवल अस्पष्ट धमकियों से मुद्दा हल किया जाए।" इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया, क्योंकि पहले भी निर्मलकुमार ने डीक्यू के खिलाफ ऐसे ही आरोप लगाए थे।
यह घटना पिछले कुछ हफ्तों में हुई कई राजनीतिक टकरावों की श्रृंखला में आती है। टामसैक मामले के अलावा, ओडिशा में निलंबित आईपीएस अधिकारी दयाल गंगवार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो चुकी है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। इन सभी घटनाओं ने जनता में सरकार की जवाबदेही और भ्रष्टाचार विरोधी उपायों की प्रभावशीलता को लेकर चर्चा को तेज़ कर दिया है।
