वैज्ञानिकों ने एक ‘सुपरह्यूमन’ एआई उपकरण विकसित किया है जो सामान्य इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम से दो सेकंड से भी कम समय में हृदय रोग की उपस्थिति का पता लगा लेता है। यह प्रणाली लाखों रोगियों के इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम डेटा पर प्रशिक्षित है और मानवीय आँख से न देखी जा सकने वाली सूक्ष्म विद्युत संकेतों को पहचानती है। इस तेज़ी से निदान करने की क्षमता से डॉक्टरों को रोगी के जोखिम स्तर का शीघ्र आकलन करने में मदद मिलेगी, जिससे समय पर उपचार संभव हो सकेगा।

पिछले कुछ महीनों में प्रकाशित शोधों ने दिखाया है कि छाती और पीठ की मांसपेशियों की घनत्व अधिक होने वाले लोग हृदयाघात के कम जोखिम में होते हैं, और मोटापे से जुड़ी हृदय रोगों से 2035 तक लाखों लोगों की मृत्यु हो सकती है। इस एआई उपकरण की सटीकता इन जोखिम कारकों को प्रारम्भिक चरण में पहचानने में सहायक होगी, जिससे जीवनशैली सुधार और चिकित्सीय हस्तक्षेप को समय पर लागू किया जा सकेगा।

भविष्य में इस तकनीक को व्यापक स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत करने से हृदय रोग की रोकथाम में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है। हालांकि, डेटा गोपनीयता और एल्गोरिदम की पारदर्शिता को सुनिश्चित करना आवश्यक होगा, ताकि रोगियों का विश्वास बना रहे। यदि सही ढंग से लागू किया जाए, तो यह उपकरण हृदय रोग से जुड़ी मृत्यु दर को घटाने और स्वास्थ्य खर्च को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।