उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने मैकविटीज़ के होलवहिट मारि बिस्किट के लेबल को भ्रामक घोषित किया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बिस्किट में केवल उन्नीस दशमलव पाँच प्रतिशत सम्पूर्ण गेहूँ का आटा है, जबकि बाकी पचास दो प्रतिशत परिष्कृत मैदा से बना है। इस असंतुलन ने उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद का झूठा भरोसा दिलाया, जिससे उनके पोषण संबंधी निर्णय प्रभावित हुए।
सीसीपीए ने कंपनी को “होलवहिट” शब्द को पैकेजिंग से हटाने और सही घटक अनुपात दर्शाने का निर्देश दिया। इस निर्णय के बाद मैकविटीज़ ने अपने पैकेजिंग को संशोधित करने की इच्छा जताई और उपभोक्ता को सटीक जानकारी प्रदान करने का वचन दिया। यह कदम उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया, जैसा कि पिछले कुछ महीनों में मटन आपूर्ति संकट और फैशन विज्ञापनों में भ्रामक दावों के खिलाफ उठाए गए कदमों से स्पष्ट है।
पिछले समय में पंजाब सरकार द्वारा लगाए गए चार प्रतिशत कर को “गुंडा कर” कहकर विरोध करने वाले कश्मीर के मटन विक्रेताओं ने भी उपभोक्ता हित में आवाज़ उठाई थी। इसी प्रकार, यूके नियामक द्वारा एडिडास, यूनिक्लो और कैल्विन क्लेन के पर्यावरणीय दावों पर प्रतिबंध ने उपभोक्ता जागरूकता को बढ़ाया। इन सभी घटनाओं ने यह सिद्ध किया है कि उपभोक्ता सुरक्षा के मुद्दे अब विभिन्न क्षेत्रों में प्रमुखता से सामने आ रहे हैं, और नियामक संस्थाएँ सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रही हैं।

