तमिलनाडु के दो शहरों में एक ही सप्ताह में हुई दो होच (अवैध शराब) की त्रासदी ने जनता को हिला कर रख दिया। कुल मिलाकर २२ लोगों की मौत हो गई और ४५ लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती हुए। यह हादसे तब सामने आए जब राज्य सरकार ने कहा था कि अवैध शराब का कारोबार अब समाप्त हो चुका है, जिससे लोगों में गहरी निराशा और गुस्सा उत्पन्न हुआ।
जांच में पता चला कि इस घोटाले में कई बुटीक शराब विक्रेता, आपूर्ति करने वाले उप‑एजेंट और कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे, जिन्होंने इस अवैध व्यापार को बढ़ावा दिया। पुलिस ने इस मामले में १७ व्यक्तियों को गिरफ्तार कर हत्या के आरोप में दायर किया है। इस घटना को समझने के लिए हमें पिछले कुछ हफ्तों की अन्य घटनाओं को भी देखना चाहिए, जैसे कर्नाटक में टोल‑फ्री मेहकरी‑हेब्बल टनल का उद्घाटन और ओडिशा में भारी बारिश से उत्पन्न आपातकालीन स्थिति, जो राज्य प्रशासन की विभिन्न चुनौतियों को दर्शाती हैं।
इस त्रासदी पर तमिलनाडु के राजनेता जी.के. वसन ने सरकार से अपील की है कि डॉक्टरों की मांगों के साथ ही अवैध शराब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए नीतियों को सख्त करना आवश्यक है और पीड़ितों के परिवारों को उचित सहायता प्रदान करनी चाहिए। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस निगरानी को मजबूत करना, शराब की तस्करी के नेटवर्क को तोड़ना और जनजागरूकता अभियान चलाना अनिवार्य होगा।

