कोयंबटूर उपभोक्ता कारण समूह ने हाल ही में बताया कि कई अस्थायी संरचनाओं को स्थायी मानकर कर योग्य क्षेत्र में जोड़ दिया जा रहा है। छतरी, पंडाल, खुले कार पार्क की छायाएँ और धूप से बचाव के तंबू, जो आमतौर पर मौसमी उपयोग के लिए बनते हैं, अब कर के दायरे में आ गए हैं। यह कदम न केवल छोटे व्यापारियों को आर्थिक बोझ में डाल रहा है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन स्तर पर भी असर डाल रहा है।
इस कर पुनर्मूल्यांकन में ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जमीन के विस्तृत नक्शे बनाकर कर योग्य क्षेत्र निर्धारित किया जाता है। हालांकि, ड्रोन द्वारा प्राप्त डेटा में अक्सर अस्थायी संरचनाओं को स्थायी मान लिया जाता है, जिससे कर की गणना में त्रुटि होती है। इस संदर्भ में, पिछले सप्ताह जी.के. वासन ने डॉक्टरों की मांगों को लेकर सरकार को कार्रवाई करने का आग्रह किया था, और इसी तरह की पारदर्शिता की मांग अब कर नीति में भी देखी जा रही है।
तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में मद्रास उच्च न्यायालय के गाय हत्या प्रतिबंध के आदेश को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, और विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी सरकार से कई मुद्दों पर मुलाकात की है। इन सभी घटनाओं ने प्रशासनिक निर्णयों में जनता की भागीदारी और स्पष्टता की आवश्यकता को उजागर किया है। उपभोक्ता समूह ने अब सरकार से अनुरोध किया है कि ड्रोन‑आधारित संपत्ति कर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया की पुनः समीक्षा की जाए, ताकि अस्थायी संरचनाओं को कर योग्य क्षेत्र में न जोड़ा जाए और करदाताओं का उचित संरक्षण हो सके।

