टार्गेट ने हाल ही में एक बच्चों की क्लाउन पोशाक को अपने ऑनलाइन और स्टोर दोनों से हटा दिया, जब सोशल मीडिया पर इस पर तीव्र आलोचना हुई। विज्ञापन में काली त्वचा वाले बच्चे को चमकीले नारंगी और काले रंग के कपड़े में दिखाया गया था, जिसमें काली दस्ताने और बड़ी मुस्कान वाला मुखौटा था, जिसे कई लोगों ने ऐतिहासिक मिन्स्ट्रल शो की नकारात्मक छवियों से तुलना की। इस प्रकार की छवि को नस्लीय रूढ़ियों को बढ़ावा देने वाला माना गया, जिससे उपभोक्ताओं ने कंपनी से माफी और उत्पाद वापसी की माँग की।
टार्गेट ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस पोशाक को हटाने के साथ ही सार्वजनिक माफी जारी कर रहा है और भविष्य में ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अधिक सतर्कता बरतने का वचन दिया है। यह कदम उसी समय आया जब विभिन्न क्षेत्रों में कंपनियों को सामाजिक जिम्मेदारी के कारण कड़ी जांच का सामना करना पड़ रहा है; जैसे कारट्रेड टेक के शेयरों में नॉमुरा की सकारात्मक रेटिंग के बाद उछाल आया, और राष्ट्रीय कांग्रेस सरकार को नौकरी संबंधी आरोपों पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता और नागरिक समाज दोनों ही कंपनियों और संस्थाओं से पारदर्शिता और नैतिकता की अपेक्षा कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सार्वजनिक प्रतिक्रिया न केवल उत्पाद की बिक्री को प्रभावित करती है, बल्कि ब्रांड की दीर्घकालिक छवि पर भी गहरा असर डालती है। टार्गेट की इस कार्रवाई को कई सामाजिक संगठनों ने सकारात्मक रूप से सराहा, जबकि कुछ ने इसे केवल सतही कदम मानते हुए भविष्य में अधिक ठोस नीतियों की माँग की। इस घटना ने यह भी उजागर किया कि डिजिटल युग में सामाजिक मीडिया की शक्ति कितनी बड़ी है, और कैसे एक ही पोस्ट कई देशों में बहस को जन्म दे सकता है।

