न्यूयॉर्क में पत्रकारों से मुलाकात के दौरान गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुल्लिन ने कहा कि आव्रजन एवं सीमा प्रवर्तन एजेंटों को मतदान स्थलों पर तब भेजा जा सकता है जब वहाँ कोई सुरक्षा खतरा हो या वारंट लागू करने की आवश्यकता हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि एजेंटों का मुख्य कार्य मतदान स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना। यह बयान अमेरिकी चुनावी माहौल में एक नया मोड़ दर्शाता है, जहाँ सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच प्रशासन ने कठोर कदम उठाने का इरादा जताया है।
पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने नागरिकता आवेदन शुल्क में ७५ प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव रखा था, जिससे आव्रजन प्रक्रिया में कठिनाइयाँ बढ़ने की आशंका है। साथ ही, ट्रम्प प्रशासन के तहत आव्रजन नीतियों में कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, जैसे कि अस्थायी सुरक्षा स्थिति (टीपीएस) वाले ३५०,००० से अधिक लोगों को हटाने की योजना। इन पृष्ठभूमियों को देखते हुए, मुल्लिन का यह बयान यह संकेत देता है कि सुरक्षा एजेंसियों को चुनावी प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की संभावना बढ़ रही है।
हालांकि, इस कदम की आलोचना कई नागरिक अधिकार संगठनों ने की है, जो इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखते हैं। वे तर्क देते हैं कि मतदान स्थलों पर सुरक्षा एजेंटों की उपस्थिति मतदाता भय उत्पन्न कर सकती है और चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है। इस बीच, अमेरिकी न्यायालय ने हाल ही में कुछ प्रवासी समूहों को अस्थायी सुरक्षा स्थिति से बाहर कर दिया है, जिससे सामाजिक तनाव और बढ़ रहा है। इस प्रकार, सुरक्षा, आव्रजन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गया है।

