वॉशिंगटन डी.सी. के केनेडी सेंटर के प्रमुख प्रबंधन ने बताया कि भवन की संरचनात्मक स्थिति अत्यंत नाजुक है और तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। राष्ट्रपति ट्रम्प के वकीलों ने अदालत में कहा कि यदि दो सौ पचास करोड़ डॉलर की नवीनीकरण योजना को लागू नहीं किया गया तो केंद्र को ध्वस्त करने का आदेश दिया जाएगा। यह बयान पिछले कुछ हफ्तों में ट्रम्प प्रशासन द्वारा कई सांस्कृतिक संस्थानों पर दबाव बनाने की श्रृंखला में एक नया मोड़ है, जिसमें केनेडी केंद्र का नाम बदलने का प्रयास और उसके बाद के विवाद शामिल हैं।
पिछले सप्ताह, एक न्यायाधीश ने ट्रम्प प्रशासन को आदेश दिया था कि वह केनेडी केंद्र की façade को ढँकने वाले बड़े तंबू को हटाने की व्याख्या करे, क्योंकि वह तंबू पूर्व में ट्रम्प के नाम को हटाने के बाद लगाया गया था। इस आदेश के बाद प्रशासन ने तंबू को हटाने के साथ ही नवीनीकरण की लागत को दो सौ पचास करोड़ डॉलर बताया, जो कि केंद्र के इतिहासिक महत्व को बचाने के लिए आवश्यक माना गया। इस बीच, सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की धमकी से संस्थानों की स्वायत्तता को नुकसान पहुँचा तो कला और संस्कृति पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।
केनेडी केंद्र के कर्मचारियों और कलाकारों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया और कहा कि नवीनीकरण के बजाए संवाद और सहयोग से समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने पिछले महीने प्रकाशित एक पत्र में बताया कि केंद्र के इतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और पर्याप्त फंडिंग की आवश्यकता है, न कि धमकी और विधिक दबाव से। इस विवाद ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया, जहाँ कई देशों ने अमेरिकी सांस्कृतिक नीतियों की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं। अब अदालत का फैसला इस बात का निर्धारण करेगा कि क्या केनेडी केंद्र को वास्तव में ध्वस्त किया जाएगा या नहीं।

