पिछले कुछ हफ्तों में ट्रम्प प्रशासन ने मध्य पूर्व में अपनी कूटनीतिक रुख को दृढ़ किया है, जहाँ सीरिया और इरान के साथ हुए विवादों ने क्षेत्रीय तनाव को उजागर किया। इसी प्रवृत्ति के तहत, ऑस्ट्रेलिया के लेबर सरकार द्वारा प्रस्तावित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नियमन को संयुक्त राज्य ने आर्थिक दबाव के रूप में पहचाना है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि डिजिटल सेवा कर, जुर्माना और अन्य आर्थिक उपायों से अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों को नुकसान पहुँचाया जा सकता है, जिससे दोनो देशों के व्यापारिक संबंधों में खटास आ सकती है।
ऑस्ट्रेलिया की नई योजना में सोशल मीडिया कंपनियों को हानिकारक सामग्री को तुरंत हटाने और उपयोगकर्ताओं को एल्गोरिद्म‑जनित ‘फ़ॉर यू’ फ़ीड से बाहर निकलने का विकल्प देने का आदेश दिया गया है। यदि कंपनियां इस नियमन का उल्लंघन करती हैं तो उन्हें सौ करोड़ डॉलर से अधिक का जुर्माना लगाया जाएगा, और सरकार इस राशि को और बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस कदम का उद्देश्य ऑनलाइन सुरक्षा को सुदृढ़ करना है, परन्तु अमेरिकी कंपनियों के लिए यह आर्थिक बोझ बन सकता है।
ट्रम्प प्रशासन ने इस नियमन को डिजिटल सेवा कर और अन्य आर्थिक उपायों के रूप में देख कर ऑस्ट्रेलिया को चेतावनी दी है कि ऐसे कदमों से दोनो देशों के बीच व्यापारिक समझौते प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विवाद को राजनयिक स्तर पर हल नहीं किया गया तो दोनों देशों के बीच निर्यात‑आयात और तकनीकी सहयोग में बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इस स्थिति में दोनों पक्षों को संवाद के माध्यम से समाधान खोजने की आवश्यकता है, ताकि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास में कोई बाधा न आए।

