ट्रम्प प्रशासन ने हाल ही में विश्वविद्यालयों को जांच और वित्तीय दबाव के माध्यम से विदेशी छात्रों के इंटर्नशिप पर प्रतिबंध लगाने की योजना घोषित की है। यह कदम कई कारणों से उठाया गया है, जिनमें इज़राइल के खिलाफ गाज़ा में हुए हमले पर प्रो-फ़िलिस्तीनी प्रदर्शन, विविधता और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यक्रमों पर सवाल, तथा लिंग परिवर्तन नीतियों पर विरोध शामिल हैं। इस नीति का उद्देश्य विश्वविद्यालयों को सरकार के अनुकूल बनाना और राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में लाना बताया गया है।
पिछले कुछ महीनों में ट्रम्प प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता को समाप्त करने के ट्रम्प के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे उनके कई अन्य योजनाओं पर असर पड़ा। जून में इरान के साथ वार्ता को मध्य पूर्व में व्यापक रीसेट का मार्ग मानते हुए नई कूटनीति की घोषणा की गई, जबकि कैलिफ़ोर्निया के तटीय एजेंसी को पर्यावरणीय आतंक के आरोप में जांच का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं ने प्रशासन की कड़ी रुख को स्पष्ट किया है, जिससे विदेशी छात्रों के इंटर्नशिप पर प्रतिबंध की संभावना और भी बढ़ गई है।
विदेशी छात्रों के लिए इस नीति के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इंटर्नशिप न केवल शैक्षणिक अनुभव को समृद्ध करती है, बल्कि रोजगार के अवसरों को भी सुदृढ़ करती है। यदि यह प्रतिबंध लागू हो जाता है, तो कई छात्रों को अपने करियर की दिशा बदलनी पड़ सकती है और संयुक्त राज्य की उच्च शिक्षा संस्थानों की अंतर्राष्ट्रीय आकर्षण शक्ति घट सकती है। इस पर छात्र संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों ने विरोध व्यक्त किया है, और वे सरकार से संवाद करके नीति में संशोधन की मांग कर रहे हैं।

