दिल्ली के विशेष न्यायालय ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दायर 737 पृष्ठों की विस्तृत चार्जशीट को मान्यता दी, जिसमें रेड फोर्ट पर 1 फरवरी को हुए बम विस्फोट के सभी दस आरोपी शामिल हैं। इस चार्जशीट में बताया गया है कि मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (विधव) अब इस मामले में मृत घोषित हो चुके हैं, लेकिन उनके सहयोगियों को अंसार ग़ज़वात‑उल‑हिंद से जोड़ा गया है, जो अल‑कायदा की भारतीय शाखा का एक उभयचर समूह है।

जांच एजेंसी ने यह भी उजागर किया कि आरोपियों ने विस्फोट की योजना कई महीनों से तैयार की थी और इस दौरान कई सशस्त्र सामग्री और धनराशि का लेन‑देन हुआ था। चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि कई गुप्त संवाद और वित्तीय लेन‑देन के माध्यम से इस हमले को अंजाम दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक संगठित आतंकवादी साजिश थी।

अदालत ने इस चार्जशीट को मान्य कर लिया है और आगे की सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित की है। न्यायिक प्रक्रिया के तेज़ी से चलने से पीड़ितों के परिवारों को न्याय मिलने की आशा बढ़ी है। इस मामले में पिछले संबंधित खबरों में भी अंसार ग़ज़वात‑उल‑हिंद की अन्य आपराधिक गतिविधियों का उल्लेख किया गया था, जिससे इस समूह की व्यापक जाँच की आवश्यकता स्पष्ट हुई है।