एमनेस्टी ने हाल ही में जारी किए गए एक विस्तृत रिपोर्ट में कहा है कि दिल्ली और बिहार में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया। गवाहों की गवाही और वीडियो साक्ष्य से यह स्पष्ट हुआ कि पेललेट‑फायरिंग शॉटगन, आँसू गैस लॉन्चर, ग्रेनेड, बेटन और विद्युत् शॉक उपकरणों का उपयोग किया गया, जिससे कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं। इस प्रकार का बल प्रयोग न केवल संविधान के अनुच्छेद १९ की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के भी विरुद्ध है।

पिछले कुछ हफ्तों में मणिपुर के कांगपोक्पी जिले में नगा महिलाओं के विरोध में सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की शिकायतें सामने आई थीं, जहाँ एएनएसएएम ने पुलिस पर अत्याचार का आरोप लगाया था। इसी प्रकार, ओडिशा में एक १५ वर्षीय लड़की के फोन के अत्यधिक उपयोग के कारण आत्महत्या की घटना ने भी सुरक्षा और अधिकारों के दुरुपयोग को उजागर किया। इन घटनाओं की पृष्ठभूमि में पुलिस द्वारा बल प्रयोग की प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दिखती है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करती है।

एमनेस्टी ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भारतीय सरकार से अनुरोध किया है कि वे पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग की जांच करें और जिम्मेदार अधिकारियों को सजा दिलाएँ। साथ ही, प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ, ताकि भविष्य में ऐसी हिंसात्मक घटनाएँ दोहराई न जाएँ।