संयुक्त राज्य के वन सेवा प्रमुख टॉम शुल्ट्ज़, जो पहले लकड़ी उद्योग के लॉबिस्ट और कार्यकारी रहे हैं, पर अब उनके पूर्व संबंधों को लेकर सार्वजनिक जांच चल रही है। उपभोक्ता अधिकार समूह पब्लिक सिटिजन के अध्ययन के अनुसार, यदि ट्रम्प सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘रोडलेस नियम’ को रद्द किया गया, तो शुल्ट्ज़ द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए कंपनियों को सीधे लाभ होगा। यह नियम २००१ में स्थापित हुआ था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय वन में लगभग ४५ मिलियन एकड़ भूमि को अछूता रखना था।
ट्रम्प के इस कदम का समर्थन कई उद्योग समूह और रिपब्लिकन सांसदों ने किया है, जो मानते हैं कि इस नियम को हटाने से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन होगा। परन्तु पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वन्यजीवों का आवास नष्ट होगा और जलवायु परिवर्तन की समस्या और बढ़ेगी। इस बीच, पूर्वी भारत में गारो हिल्स के वन विभाग में हाल ही में हुई घटनाओं ने भी इस मुद्दे को उजागर किया है, जहाँ वन अधिकारी के पद पर नियुक्तियों और खर्चों को लेकर सवाल उठे थे।
पिछले महीने ओडिशा में ‘पाख़ला दिवस’ पर २.३२ करोड़ रुपये खर्च करने की सार्वजनिक जांच ने भी सरकारी खर्चों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी नीतियों और खर्चों को लेकर जनता की सतर्कता बढ़ रही है। इसी प्रकार, पूर्व SCERT निदेशक पर पाठ्यपुस्तक त्रुटि के कारण हुई निलंबन ने भी शैक्षिक नीतियों में पारदर्शिता की मांग को बढ़ाया। इन सभी घटनाओं के प्रकाश में, वन सेवा प्रमुख पर चल रही जांच न केवल उनके व्यक्तिगत संबंधों को बल्कि व्यापक सरकारी नीतियों की जवाबदेही को भी चुनौती देती है।

