ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं द्वारा संचालित इस क्लिनिकल परीक्षण में ७० वर्ष से अधिक आयु के स्वस्थ प्रतिभागियों को स्टेटिन दी गई और उन्हें पाँच वर्षों तक निरंतर निगरानी में रखा गया। परिणामस्वरूप, स्टेटिन लेने वाले समूह में हृदय‑आघात व स्ट्रोक की घटनाएँ नियंत्रण समूह की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम पाई गईं, जबकि गंभीर दुष्प्रभावों की दर बहुत ही न्यूनतम रही। यह डेटा दर्शाता है कि उम्र‑संबंधी जोखिम को कम करने में स्टेटिन का उपयोग सुरक्षित और प्रभावी हो सकता है।

पिछले कुछ हफ्तों में अंगुल में बस में आग लगने से ४० यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया, और इंग्लैंड में मोटापे‑संबंधी हृदय रोगों से २०३५ तक लगभग १,७०,००० लोगों की मृत्यु की भविष्यवाणी की गई थी। इन घटनाओं ने स्वास्थ्य‑सुरक्षा एवं रोग‑रोकथाम के महत्व को फिर से उजागर किया। इस संदर्भ में, वृद्धावस्था में स्टेटिन का उपयोग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर संभावित बोझ को भी घटा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शोध परिणामों को नीति‑निर्माताओं को प्रस्तुत कर, वृद्ध जनसंख्या के लिए स्टेटिन को एक सामान्य प्रिवेंटिव उपाय के रूप में शामिल किया जा सकता है। साथ ही, डॉक्टरों को रोगियों की व्यक्तिगत जोखिम‑प्रोफ़ाइल को ध्यान में रखते हुए दवा की खुराक व अवधि तय करनी चाहिए। इस दिशा में आगे के बड़े‑पैमाने पर किए जाने वाले अध्ययन इस निष्कर्ष को और सुदृढ़ करेंगे और स्वास्थ्य‑सेवा में नई दिशा प्रदान करेंगे।