लंदन के वित्तीय नियामक ने हाल ही में बैंकों और कानूनी फर्मों से अनुरोध किया है कि वे उन सकारात्मक उदाहरणों को साझा करें जहाँ उन्होंने धुंधले धन को प्रणाली में प्रवेश से रोक दिया हो। यह पहल वित्तीय अपराध नियंत्रण में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती है, क्योंकि २०१८ में वित्तीय कार्रवाई कार्य समूह ने यूके को धनशोधन के उच्च जोखिम वाले देशों में वर्गीकृत किया था। सरकार का उद्देश्य यह दिखाना है कि अब लंदन ने अपनी वित्तीय प्रणाली को साफ़ करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।

भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक ने भी समान दिशा में कई कदम उठाए हैं। उसने बैंकों को MSME को विकास साझेदार मानने और डिजिटल परिवर्तन को अपनाने का निर्देश दिया, जिससे वित्तीय पारदर्शिता बढ़े। साथ ही, FCNR(B) योजना के माध्यम से विदेशी मुद्रा जमा को आकर्षित कर बैंकों की निधि स्थिति को सुदृढ़ किया गया, जिससे महँगी फंडिंग की जगह सस्ती विदेशी पूँजी का उपयोग संभव हुआ। इन उपायों ने न केवल घरेलू वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा दिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की वित्तीय नियामक छवि को भी सुदृढ़ किया।

यूके की यह नई पहल भारतीय बैंकों के अनुभवों से सीख ले सकती है। जब बैंकों ने सफलतापूर्वक धुंधले धन को रोकने के उपाय अपनाए, तो उन्होंने न केवल नियामक दबाव को कम किया, बल्कि ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ाया। इस प्रकार, यूके के वित्तीय संस्थानों को भी अपने नियामक ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए ऐसे ही सकारात्मक केस स्टडीज प्रस्तुत करने चाहिए, जिससे वैश्विक वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों को बढ़ावा मिले।