लॉयड्स बैंक के नवीनतम सर्वेक्षण में बताया गया कि अगस्त २०२६ में यूनाइटेड किंगडम के चार प्रमुख शहरों में घरों की कीमतें औसतन ०.४ प्रतिशत घट गईं। इस गिरावट का मुख्य कारण उच्च मॉर्टगेज दरें हैं, जिससे संभावित खरीदारों की वित्तीय क्षमता पर दबाव बढ़ा। साथ ही, यूरोप में चल रही भू‑राजनीतिक तनाव और महंगाई के कारण उपभोक्ता खर्च में कमी आई, जिससे आवास बाजार में मांग में गिरावट आई।
पिछले कुछ महीनों में यूके के कई बड़े शहरों में घरों की कीमतें लगातार नीचे जा रही थीं, जबकि सिडनी और एडिलेड जैसे विदेशी बाजारों में भी समान प्रवृत्ति देखी गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक आर्थिक मंदी का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर व्यापक रूप से पड़ रहा है। इस संदर्भ में, नायरा एनर्जी द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती का कदम भी उपभोक्ताओं को कुछ राहत प्रदान कर सकता है, परंतु आवास बाजार की मौजूदा अस्थिरता को दूर नहीं कर पाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्याज दरों में स्थिरता नहीं आती और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो यूके में घरों की कीमतें आगे भी गिरती रह सकती हैं। इस स्थिति में सरकार को आवास नीतियों में सुधार, पहली बार खरीदारों के लिए सब्सिडी और किफायती आवास निर्माण को बढ़ावा देना आवश्यक होगा। ऐसी नीतियों से बाजार में संतुलन स्थापित हो सकेगा और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को समर्थन मिलेगा।

