यूरोपीय संघ ने महामारी के दौरान यात्रियों के प्रवाह को सुगम बनाने के लिये प्रवेश‑निकास प्रणाली (ईईएस) में लचीलापन प्रदान किया था, जिससे बायोमेट्रिक जाँचों को कुछ हद तक टाला गया। इस नीति ने कई देशों में लंबी कतारों को कम किया, परंतु अब ६ सितंबर को इस लचीलापन का समय समाप्त हो रहा है, जिससे फिर से जाँच की कठोरता बढ़ेगी। इसी तरह, ओडिशा के लम्टापुट में एलपीजी वितरण में देरी से लंबी कतारें और तनाव उत्पन्न हुआ था, और दिल्ली में सीएनजी से इलेक्ट्रिक वाहन की ओर बदलाव के दौरान भी ड्राइवरों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जो इस नई सीमा जाँच की संभावित समस्याओं को दर्शाता है।
ईईएस के नियम समाप्त होने पर कई सदस्य देशों ने बायोमेट्रिक जाँच को लागू न करने का इरादा जताया है, जबकि कुछ देशों ने इसे अनिवार्य करने की घोषणा की है। एयरलाइन कंपनियों ने यूरोपीय आयोग से अनुरोध किया है कि वे २०२६ तक इन नियंत्रणों को स्थगित रखने के लिये विवेकाधीन शक्ति प्रदान करें, ताकि यात्रियों को अनावश्यक देरी से बचाया जा सके। इस बीच, सीमा पर सुरक्षा और प्रवास नियंत्रण को बनाए रखने के लिये तकनीकी उपायों को तेज़ी से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।
यात्रियों को अब अपने यात्रा कार्यक्रम में अतिरिक्त समय जोड़ना होगा और बायोमेट्रिक दस्तावेज़ों की तैयारी में सावधानी बरतनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सदस्य देशों में समन्वय नहीं बना रहा, तो यूरोप में पर्यटन उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस स्थिति में यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों या समय-सारिणी में बदलाव करने की सलाह दी जा रही है, ताकि यात्रा के दौरान अनावश्यक तनाव से बचा जा सके।

