लखनऊ। राजधानी लखनऊ की मायापुरी कॉलोनी से स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि गंभीर लीवर रोग से पीड़ित एक मरीज को हायर सेंटर रेफर किए जाने के बावजूद 108 एंबुलेंस कर्मियों ने उसे ले जाने से इनकार कर दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।

परिजनों के अनुसार मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी। स्थानीय चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल किसी बड़े चिकित्सा संस्थान, जैसे केजीएमयू या पीजीआई, में भर्ती कराने की सलाह दी थी। इसके बाद परिवार ने 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी और मरीज को हायर सेंटर पहुंचाने की मांग की।

आरोप है कि एंबुलेंस मौके पर पहुंचने के बाद भी मरीज को रेफर अस्पताल तक ले जाने के लिए तैयार नहीं हुई। परिजन लगातार गुहार लगाते रहे कि मरीज की हालत नाजुक है और समय पर इलाज न मिलने से उसकी जान को खतरा हो सकता है, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इस दौरान मरीज और उसके परिवार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मामला तब और गंभीर हो गया जब स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई। वायरल वीडियो में परिजन स्वास्थ्य व्यवस्था और एंबुलेंस सेवा के रवैये पर नाराजगी जताते दिखाई दे रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मरीजों को समय पर रेफर अस्पताल तक पहुंचाना आपातकालीन सेवाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की देरी मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है।

फिलहाल संबंधित विभाग की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह घटना प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।