नई दिल्ली में 19 अगस्त को आयोजित द्वितीय भारत‑मलेशिया संयुक्त कार्यसमूह बैठक ने सार्वजनिक प्रशासन और शासन सुधार के क्षेत्र में दोनो देशों के बीच सहयोग को नई दिशा दी। इस मंच पर भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (इटेक) कार्यक्रम के तहत क्षमता निर्माण के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई, जहाँ मलेशिया ने शैक्षणिक मॉड्यूल, संस्थागत यात्राओं और क्षेत्रीय दौरे के सकारात्मक प्रभावों को उजागर किया। दोनों पक्षों ने डिजिटल सरकार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाएँ, साइबर सुरक्षा और ब्लॉकचेन जैसी उन्नत तकनीकों को सार्वजनिक सेवाओं में एकीकृत करने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

बैठक में भारत ने नागरिक शिकायत निवारण प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से 24×7 डिजिटल इंटरफ़ेस प्रदान करने के अनुभव को साझा किया, जहाँ ‘समाधान दीदी’ नामक आवाज़‑आधारित चैटबॉट ने बहुभाषी और सहज सेवा प्रदान की। मलेशिया ने अपने सार्वजनिक क्षेत्र के परिवर्तन को ‘जन, प्रक्रिया और प्रौद्योगिकी’ के सिद्धांतों पर आधारित बताया, जिसमें नवाचार को मुख्य प्रेरक माना गया। दोनों देशों ने डिजिटल बुनियादी ढाँचा, डेटा‑आधारित निर्णय‑लेने और जुड़ी हुई सरकार के मॉडल को अपनाकर नागरिक‑केन्द्रित सेवाओं को तेज़ और सरल बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

पिछले वर्षों में भारत‑मलेशिया के बीच नौसैनिक स्टाफ वार्ता और जापान‑भारत के भाई‑बहन संबंधों के संदर्भ में सहयोग की पृष्ठभूमि को देखते हुए, इस कार्यसमूह ने रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का लक्ष्य रखा। मलेशिया ने 2027‑2029 के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की, जिसमें शासन साझेदारी के लिए तीन‑वर्षीय रोडमैप तैयार किया गया। दोनों पक्षों ने संस्थागत सहभागिता, ज्ञान‑साझा करने और क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर संवाद की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे सार्वजनिक संस्थानों की दक्षता बढ़े और नागरिक अनुभव में सुधार हो।