भद्रावती के निवासी १९ वर्षीय दिलीप उपनाम करिया, जो १६ आपराधिक मामलों में वांछित था, ने पुलिस की तलाशी से बचने के लिये स्थानीय तालाब में डुबकी लगाई। वह कई बार अदालत में पेशी से बचते रहा, जबकि राज्य सरकार ने कई मामलों में अभियोजन को वापस लेने का प्रस्ताव रखा था, जिसे कर्नाटक उच्च न्यायालय ने रोक दिया था। इस न्यायिक रोक ने पुलिस को अभियोजन जारी रखने का अधिकार दिया, जिससे करिया पर दबाव बढ़ा।
पुलिस ने करिया को पकड़ने के लिये विशेष टीम बनायी और तालाब के आसपास गश्त बढ़ा दी। पिछले कुछ हफ्तों में, कर्नाटक पुलिस पर कई मामलों में संचार प्रतिबंध लगाने की आलोचना हुई थी, परन्तु इस बार उन्होंने बिना किसी सूचना के ही कार्रवाई की। करिया को तालाब से बाहर निकालते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया और अब वह न्यायालय में पेश किया जाएगा।
करिया के खिलाफ चल रहे १६ मामलों में चोरी, डकैती और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं। इस गिरफ्तारी से यह स्पष्ट होता है कि न्यायिक प्रक्रियाओं की निरंतरता और पुलिस की सतर्कता मिलकर अपराधियों को पकड़ने में प्रभावी सिद्ध होती है। कर्नाटक में हाल ही में उच्च न्यायालय द्वारा अभियोजन वापस लेने पर रोक और पुलिस के संचार पर लगाए गए प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि में यह घटना एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है, जो दर्शाती है कि कानूनी बाधाओं के बावजूद न्याय व्यवस्था कार्य कर रही है।

