प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भारत की सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों पर आधारित व्यापक दृष्टि को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस मंच के माध्यम से सदस्य राष्ट्रों के बीच सहयोग को गहरा कर आतंकवाद के जाल को तोड़ा जा सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र को शांति और समृद्धि मिल सके। इस संदर्भ में उन्होंने पिछले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण को ऊर्जा सहयोग के केंद्र में रखने की अपनी योजना को दोहराया, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।

इसी दौरान भारत‑जापान आर्थिक मंच में भी सहयोग को सुदृढ़ करने की बात कही गई। प्रधानमंत्री मोरिशी तकािची ने भारत‑जापान फोरम में आर्थिक विज़न प्रस्तुत किया, जिसमें दोनो देशों के बीच व्यापार, तकनीकी साझेदारी और निवेश को बढ़ावा देने के उपाय शामिल थे। इस सहयोग से एससीओ के सदस्य देशों को नई तकनीकी और वित्तीय संसाधन मिलेंगे, जो आतंकवाद विरोधी उपायों को सुदृढ़ करेंगे।

एससीओ के सदस्य देशों ने भी भारत के इस प्रस्ताव का स्वागत किया और कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास को संतुलित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी परियोजनाओं, बुनियादी ढाँचे के विकास और डिजिटल सहयोग से आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों को समाप्त किया जा सकता है। इस प्रकार भारत की इस नई पहल से दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और अफ्रीका के देशों के बीच विश्वास और सहयोग का नया अध्याय शुरू होगा।