सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश संजीव मेहता ने राजस्थान उच्च न्यायालय में कार्यरत न्यायाधीश पर लगाए गए गंभीर आरोपों को देखते हुए तत्काल एक अन्य राज्य के मुख्य न्यायाधीश को नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विवाद का समाधान मीडिया के माध्यम से नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा, जिससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनी रहे।
राजस्थान में न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा द्वारा केस लिस्टिंग में हेरफेर करने के आरोपों ने न्यायिक प्रणाली में विश्वास को चुनौती दी है। इस पर संजीव मेहता ने न्यायिक प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए उच्च न्यायालय के प्रमुख पद पर एक बाहरी न्यायाधीश की नियुक्ति का आग्रह किया, जिससे किसी भी प्रकार के पक्षपात को रोका जा सके।
पिछले कुछ हफ्तों में पश्चिम बंगाल में दलित‑तृणमूल्य राजनीति के कारण दलों के बीच संघर्ष और सरकार द्वारा जनजातियों के लाभों पर गठित उच्चस्तरीय समिति जैसी घटनाएँ न्यायिक संस्थाओं की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही हैं। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में न्यायाधीश पी. एस. नारसिंह के नए सदस्य बनने से न्यायपालिका के भीतर संरचनात्मक बदलाव की संभावना स्पष्ट हुई है, जो इस प्रकार के विवादों को सटीक और त्वरित समाधान प्रदान करने में सहायक हो सकता है।

