मदुरै में स्थित मद्रास उच्च न्यायालय के बेंच ने एक सार्वजनिक हित याचिका दायर की है, जिसमें केंद्र और तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया गया है कि वे नेपाल में फंसे तमिलनाडु तीर्थयात्रियों की स्थिति का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित रूप से बचाने के लिए त्वरित कदम उठाएँ। इस याचिका में सभी यात्रियों की पहचान, उनके स्थान की पुष्टि और आपातकालीन सहायता प्रदान करने की मांग की गई है। याचिका के दायरकर्ता ने कहा है कि इस आपदा में कई यात्रियों की जान जोखिम में है और उन्हें तुरंत बचाने की आवश्यकता है।
यह याचिका पिछले कुछ महीनों में हुए कई सुरक्षा संबंधी घटनाओं के प्रकाश में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। केवल कुछ हफ्ते पहले तमिलनाडु में अमोनिया गैस के रिसाव से ११ ओडिशा के कामगारों की मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले की जांच का आदेश दिया था। इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल के तरताला में गोदाम के ध्वस्त होने से कई लोगों की जान गई थी, जिससे सुरक्षा मानकों पर प्रश्न उठे थे। इन घटनाओं ने सरकारी संस्थाओं की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता पर गंभीर चर्चा को जन्म दिया है, और अब यह याचिका उसी संदर्भ में प्रस्तुत की गई है।
इन घटनाओं के बीच, चेन्नई स्थित एक महामारी विज्ञानी ने एआई-आधारित स्वास्थ्य मंच “हाइव” विकसित किया है, जो रोगी डेटा को सत्यापित करके रोकथामात्मक स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ करता है। इस तकनीकी पहल ने दिखाया है कि कैसे आधुनिक तकनीक का उपयोग आपदा प्रबंधन में किया जा सकता है। याचिका में भी इस प्रकार की तकनीकी सहायता की मांग की गई है, ताकि यात्रियों की स्थिति को रीयल‑टाइम में ट्रैक किया जा सके और आवश्यक सहायता तुरंत प्रदान की जा सके। सरकार को इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

