पंजाब विश्वविद्यालय के विधि संकाय में पढ़ रहे चटन्निया सिंह को शनिवार को कैंपस के छात्रावास में मृत पाया गया। पुलिस ने बताया कि वह आत्महत्या के कारण मरा है और उसके शरीर पर कोई हिंसक संकेत नहीं मिला। छात्र का परिवार इस दुखद घटना को समझ नहीं पा रहा है और उन्होंने विश्वविद्यालय से स्पष्ट कारणों की मांग की है।
यह घटना हाल ही में कई शैक्षणिक संस्थानों में हुई आत्महत्या मामलों की श्रृंखला में जुड़ती है। पिछले सप्ताह उत्तरपूर्वी हिल विश्वविद्यालय के तुरा कैंपस में स्टाफ वेलफ़ेयर एसोसिएशन के सदस्य की मृत्यु हुई थी, जबकि हैदराबाद में दो अलग‑अलग युवाओं की आत्महत्या की खबरें सामने आई थीं, जिनमें एक 24‑वर्षीय छात्र और एक 20‑वर्षीय युवक शामिल थे। इन घटनाओं ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर संस्थानों की जिम्मेदारी को प्रश्नवाचक बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक दबाव, आर्थिक कठिनाइयाँ और सामाजिक समर्थन की कमी आत्महत्या के प्रमुख कारण बनते हैं। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करें, तनाव प्रबंधन कार्यशालाओं का आयोजन करें और छात्रों को भावनात्मक समर्थन प्रदान करने के लिए एक सक्रिय प्रणाली स्थापित करें। ऐसी पहलें भविष्य में इसी प्रकार की त्रासदियों को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।

