बरेली के एक आवासीय क्षेत्र में 28 वर्षीय फ़ैज़ान को लटके हुए पाया गया, जब वह अपने प्रेम विवाह के एक महीने बाद घर से बाहर निकला था। स्थानीय पुलिस ने बताया कि फ़ैज़ान के परिवार के कुछ सदस्य इस विवाह से असंतुष्ट थे और उन्होंने युवक के साथ सभी सामाजिक संबंध तोड़ दिए थे। इस पारिवारिक टकराव ने युवक को गहरी मानसिक पीड़ा में डाल दिया, जिससे वह निराशा के सागर में डूब गया।

पुलिस की प्रारम्भिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि फ़ैज़ान ने अपने परिवार से अलगाव के कारण निरंतर तनाव का सामना किया था। वह अक्सर अपने रिश्ते को लेकर परिवार के विरोध का जिक्र करता रहता था और इस कारण उसकी मनोस्थिति बिगड़ती जा रही थी। इस घटना के बाद सामाजिक संगठनों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की मांग की, जबकि कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि प्रेम विवाह के बाद भी पारिवारिक समर्थन न मिलने पर व्यक्ति के जीवन में गंभीर जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।

इस मामले को देखते हुए, गुजरात उच्च न्यायालय के पिछले दो निर्णयों का उल्लेख किया गया, जहाँ हिन्दू विवाह में रिवाजों की अनुपस्थिति को वैधता से बाहर कर दिया गया था। उन मामलों में न्यायालय ने कहा था कि केवल पंजीकरण पर्याप्त नहीं, बल्कि पारम्परिक रीति-रिवाजों का पालन भी अनिवार्य है। बरेली की इस दुखद घटना ने यह सवाल उठाया है कि सामाजिक मान्यताओं और कानूनी ढाँचे के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे त्रासदियों को रोका जा सके।