पूर्वी दिल्ली के मौजपुर क्षेत्र में स्थित एक बाल देखभाल केंद्र में तीन साल के बच्चे पर किए गए हमले की वीडियो निगरानी से स्पष्ट हुआ कि बच्चा अत्यंत भयावह स्थिति में था। पिता ने बताया कि जब उन्होंने फुटेज देखा तो उनका मन टूट गया और वे अपने बच्चे के प्रति भय और असुरक्षा महसूस करने लगे। इस घटना ने न केवल परिवार को बल्कि आसपास के समुदाय को भी गहरा शोक में डाल दिया।
पिछले कुछ हफ्तों में स्कॉटलैंड में एंटी‑मुस्लिम हिंसा के शिकारों की पीड़िताओं के मनोवैज्ञानिक दर्द और गोवा में हाई कोर्ट द्वारा बच्चों के लिए मनोवैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त करने की खबरें इस आघात को और गहरा करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में तुरंत मनोवैज्ञानिक सहायता देना आवश्यक है, ताकि बच्चे और उनके परिवार को दीर्घकालिक मानसिक क्षति से बचाया जा सके। पिता ने भी इस दिशा में कदम उठाने की मांग की है।
समाज में सुरक्षा की भावना को पुनर्स्थापित करने के लिए कई समूहों ने कड़े नियमों और निगरानी की मांग की है। पिता ने कहा कि अब वह अपने ही बच्चों से डरता है और वह सरकार से इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की अपील कर रहे हैं। इस घटना ने बाल सुरक्षा के मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया है, और आशा है कि जल्द ही प्रभावी उपाय लागू होंगे।

