सूरत के एक उपनगर में दोपहर के समय एक किशोर अपने मित्रों के साथ खेल रहा था। वह एक पुरानी मस्जिद की तीसरी मंजिल पर चढ़ा और पास के निर्माणाधीन इमारत की छत पर कूदने का प्रयास किया। लेकिन पैर फिसलने से वह नीचे गिर गया और लोहे की छड़ उसके कंधे में घुस गई, जिससे छड़ का एक सिरा उसके मुंह से बाहर निकला।

घटना के तुरंत बाद पास के आपातकालीन बचाव दल, जो पहले ही हैदराबाद में समान घटना में सफलतापूर्वक ड्राइवर को बचा चुका था, मौके पर पहुँचा। उन्होंने तेज़ी से छड़ को हटाया और घायल बच्चे को स्थिर किया। स्थानीय अस्पताल में पहुंचते ही डॉक्टरों ने घाव की जाँच की और रक्तस्राव को रोकने के लिए सर्जरी की। समय पर किए गए उपचार से बच्चा गंभीर जटिलताओं से बच गया।

इस घटना ने शहर में सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न उठाए हैं। पिछले महीने हैदराबाद में भी समान दुर्घटना में एक ऑटो चालक को लोहे की छड़ ने घायल किया था, जिससे बचाव दल की तत्परता की सराहना हुई थी। विशेषज्ञों ने कहा कि निर्माण स्थल और पुरानी संरचनाओं में सुरक्षा रेलिंग और चेतावनी संकेतों की कमी अक्सर ऐसी दुर्घटनाओं का कारण बनती है। स्थानीय प्रशासन ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी सार्वजनिक और निर्माणस्थल की सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाएगा।