राष्ट्रीय सम्मेलन के विधायक ने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा में कहा कि दिल्ली के कुछ राजनीतिक कारक कांग्रेस के भीतर विद्रोह को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने यह आरोप लगाया कि दिल्ली की साजिश के तहत कई सांसदों को पार्टी से अलग होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का विभाजन हो सकता है। यह बयान उसी समय आया जब जम्मू‑कश्मीर में टीएमसी के विद्रोही समूहों ने अपने नेता को अलग पहचान दिलाने की कोशिश की थी, जिससे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी।
पिछले कुछ हफ्तों में टीएमसी के कई विधायक और सांसद ने पार्टी से अलग होने की मांग की, और कुछ ने अपने आप को नई पार्टी के रूप में स्थापित करने की कोशिश की। इस प्रक्रिया में उन्होंने कई बार दिल्ली के राजनीतिक दलों से समर्थन मांगा, जिससे दिल्ली को इस विखंडन का मुख्य केंद्र माना गया। राष्ट्रीय सम्मेलन के नेता ने इस बात को उजागर करते हुए कहा कि यदि इस प्रकार की साजिशें जारी रहीं तो राष्ट्रीय राजनीति में गहरा असर पड़ेगा।
वर्तमान में केंद्र और राज्य के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं, और इस प्रकार के आरोपों से दोनों पक्षों के बीच विश्वास का अंतर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन आरोपों की जाँच नहीं की गई तो राजनीतिक माहौल और अधिक अस्थिर हो सकता है, जिससे चुनावी रणनीतियों में बदलाव की आवश्यकता पड़ेगी। इस संदर्भ में राष्ट्रीय सम्मेलन ने सभी स्तरों पर एकजुटता की पुकार की है और दिल्ली के किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को रोकने की मांग की है।

