राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह का संचालन किया, जिसमें देश भर के ८२ उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इन शिक्षकों ने अपने कक्षा में नवाचार, समावेशी शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा ही वह आधारस्तंभ है जिस पर भारत का भविष्य निर्मित होगा, और इस सम्मान से शिक्षकों को नई ऊर्जा मिलेगी।

यह सम्मान राष्ट्रपति के पिछले कई पहलुओं से जुड़ा है। जुलाई में उन्होंने उपराष्ट्राध्यक्ष के रूप में अतिविशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित एक नौसेना अधिकारी को सम्मानित किया था, और उसी महीने उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय में युवा शक्ति को विकास का मुख्य प्रेरक बताया था। इन सभी घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति युवा और शिक्षा दोनों को राष्ट्रीय प्रगति के प्रमुख स्तंभ मानती हैं।

पिछले महीने राष्ट्रपति ने पद्म पुरस्कारों के वितरण में भी भाग लिया, जहाँ उन्होंने खेल, कला और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त व्यक्तियों को सम्मानित किया। इस बार शिक्षक दिवस पर उनका यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में समान मान्यता प्रदान करता है, जिससे शिक्षकों की सामाजिक स्थिति में सुधार होगा और छात्रों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। इस प्रकार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह कदम भारत के विकास के व्यापक लक्ष्य, ‘विकसित भारत २०४७’ के साथ पूरी तरह मेल खाता है।