धर्मवीर गांधी ने कहा कि उन्होंने पहले ही निर्वाचन आयोग को लिखित आपत्ति भेजी थी और सभी आवश्यक दस्तावेज़ संलग्न किए थे, परन्तु प्रारूपिक मतदाता सूची में उनका नाम अभी भी अनुपस्थित है। यह स्थिति उनके निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखी जा रही है, जिससे उनके समर्थकों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने इस त्रुटि को सुधारने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

पिछले दिनों में पंजाब में एक जीवन दंडी अपराधी को कई वर्षों बाद पकड़ा गया, जिससे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज़ हुई। इसी बीच, राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने राहुल गांधी को ‘अंशकालिक राजनेता’ कहकर आलोचना की, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया। इन घटनाओं ने प्रदेश में राजनीतिक माहौल को और अधिक जटिल बना दिया है, जिससे मतदाता सूची जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं की शुद्धता पर भी सवाल उठे हैं।

जम्मू और कश्मीर की कैबिनेट ने सामाजिक कल्याण विभाग की मसौदा प्रतिक्रिया को मंजूरी दी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। धर्मवीर गांधी ने इस संदर्भ में कहा कि मतदाता सूची में त्रुटियों को दूर करने के लिए एक पारदर्शी और त्वरित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा हो सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो वे न्यायिक मार्ग अपनाएंगे।