प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ७ नवम्बर २०२५ को वन्दे मातरम् के १५०वें जन्मवर्षगाँठ के उपलक्ष्य में एक वर्षीय स्मरण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस कार्यक्रम में गीत के इतिहास, रचना और राष्ट्रीय भावना को उजागर करने हेतु विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। सरकार ने इस अवसर पर स्कूल‑कॉलेजों में गीत के अध्ययन को अनिवार्य करने की योजना भी पेश की।

दिसंबर में दोनों सदनों ने इस विषय पर विशेष चर्चा की, जहाँ १९३७ में कांग्रेस द्वारा लिये गये निर्णय की पुनः समीक्षा की गई। कई सांसदों ने गीत के कुछ पदों को सामाजिक संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से चुनौती दी, जबकि अन्य ने इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मानते हुए समर्थन किया। इस बहस को पश्चिम बंगाल में हाल ही में पारित एंटी‑सोशल एक्टिविटीज़ बिल की तीव्र बहस के समान ही उग्र माना गया, जहाँ विभिन्न विचारधाराओं के बीच टकराव स्पष्ट था।

वन्दे मातरम् के स्मरण के साथ‑साथ देश में चल रहे अन्य प्रमुख मुद्दों को भी उजागर किया गया। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में स्पेन की जीत और कैलिफ़ोर्निया के समुद्री पक्षियों की संकट जैसी खबरें राष्ट्रीय चर्चा में थीं। इन विविध घटनाओं ने यह दर्शाया कि सांस्कृतिक विरासत के सम्मान के साथ‑साथ पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। इस प्रकार, वन्दे मातरम् का सफ़र न केवल इतिहास में बल्कि वर्तमान राष्ट्रीय संवाद में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।