नई दिल्ली: राजधानी के जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन अब एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। देश के भविष्य यानी छात्रों और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन आज 24वें दिन भी जारी रहा। वहीं, इस आंदोलन को अपना समर्थन देने और छात्रों को न्याय दिलाने के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे विख्यात शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का आज 16वां दिन है।

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत, दांव पर लगी जान

जंतर-मंतर के मंच से आ रही खबरें देश को झकझोरने वाली हैं। CJP द्वारा जारी हेल्थ अपडेट के अनुसार, पिछले 16 दिनों से अन्न का एक दाना न लेने के कारण सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने अब तक 8.2 किलोग्राम वजन खो दिया है। उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल खतरनाक स्तर तक गिरकर 67 mg/dL पर पहुंच चुका है और उनका ब्लड प्रेशर 107/70 mm Hg रिकॉर्ड किया गया है।

शारीरिक कमजोरी के कारण उनके लिए बोलना और चलना भी दूभर हो गया है, लेकिन उनके हौसले अब भी हिमालय जैसे अडिग हैं। वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों को पूरा नहीं करती और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं लाती, वह अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे।

क्या हैं प्रमुख मांगें?

CJP और सोनम वांगचुक का यह दोहरा आंदोलन दो अत्यंत महत्वपूर्ण मोर्चों पर न्याय की गुहार लगा रहा है:

  1. शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: NEET पेपर लीक और परीक्षा में हुई कथित धांधलियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें।

  2. पीड़ित परिवारों को मुआवजा: परीक्षा की अनियमितताओं के चलते मानसिक तनाव और अवसाद में आकर आत्महत्या करने वाले 20 से अधिक छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।

  3. लद्दाख के लिए लोकतांत्रिक अधिकार: लद्दाख में ब्यूरोक्रेसी के बजाय एक चुनी हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत सुरक्षा कवच प्रदान किया जाए।

"यह सरकार और हमारे बीच के अहंकार की लड़ाई नहीं है, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और इंसानी जिंदगियों का सवाल है। अपनी गलती मानना कोई कमजोरी नहीं बल्कि परिपक्वता और जवाबदेही की निशानी है। हम सिर्फ जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।"अभिजीत डिपके, संस्थापक, CJP

विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का उमड़ा जनसैलाब

सरकार की गहरी चुप्पी के बीच इस आंदोलन को देशव्यापी समर्थन मिल रहा है। 'आम आदमी पार्टी' (AAP) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलनकारियों और सोनम वांगचुक के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की। इसके साथ ही CPI(M) के सांसद अमरा राम और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के कार्यकर्ता भी इस भूख हड़ताल में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। भूख हड़ताल पर बैठे कई अन्य छात्र नेताओं की तबीयत भी नाजुक बनी हुई है।

20 जुलाई को 'संसद मार्च' की तैयारी

CJP के प्रवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि सरकार चाहे दमनकारी नीतियों का सहारा ले या राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसी धाराओं का डर दिखाए, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। आगामी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक विशाल और शांतिपूर्ण 'पैदल मार्च' निकाला जाएगा, जिसमें देश भर से छात्र, अभिभावक और आम नागरिक शामिल होंगे।

क्या यह संवेदनहीन व्यवस्था एक महान देशभक्त और देश के युवाओं की पुकार सुनेगी, या फिर अहंकार की इस लड़ाई में देश के भविष्य को यूं ही तड़पने के लिए छोड़ दिया जाएगा? यह सवाल आज पूरा देश पूछ रहा है।