नई दिल्ली: प्रदूषण मुक्त भारत और कच्चे तेल के आयात को घटाने की आड़ में भाजपा सरकार द्वारा थोपी गई E20 एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल नीति एक नए घोटाले का रूप ले चुकी है। आम जनता इस नीति को 'एथेनॉल टैक्स' करार दे रही है। बिना उपभोक्ताओं को कोई विकल्प दिए सभी पेट्रोल पंपों पर 20% एथेनॉल मिला हुआ तेल बेचा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एथेनॉल का उत्पादन पेट्रोल से काफी सस्ता है, तो इस कटौती का आर्थिक लाभ जनता को क्यों नहीं मिल रहा?
ईंधन में मिलावट के कारण गाड़ियों का माइलेज 15% तक गिर गया है और पुरानी गाड़ियों के इंजन कबाड़ हो रहे हैं। इस मुद्दे पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की चुप्पी और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का अजीबोगरीब बचाव सरकार के भीतर के विरोधाभास को दिखाता है। जनता का आरोप है कि भाजपा कॉर्पोरेट घरानों और बड़े चीनी मिल मालिकों को फायदा पहुंचाने के लिए देश की करोड़ों पुरानी गाड़ियों और आम लोगों की जेब को दांव पर लगा रही है।

