नई दिल्ली: देश के लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगाने वाले NEET पेपर लीक घोटाले ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की साख पर बड़ा बट्टा लगा दिया है। परीक्षा कराने वाली नोडल एजेंसी NTA की लगातार नाकामी और शिक्षा मंत्रालय के ढुलमुल रवैये ने युवाओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। विपक्ष के साथ-साथ अब आम नागरिक भी यह सवाल पूछ रहे हैं कि खुद को 'जीरो टॉलरेंस' वाली सरकार कहने वाली भाजपा आखिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों नहीं ले रही है?
जंतर-मंतर पर CJP और सोनम वांगचुक जैसे बड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं के बढ़ते विरोध प्रदर्शन ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। आलोचकों का कहना है कि सरकार छात्रों की आत्महत्याओं और मानसिक तनाव के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है। देश के करोड़ों युवाओं और उनके माता-पिता के मेहनत की कमाई को कोचिंग माफियाओं के हवाले छोड़ देने वाली इस नीति के खिलाफ अब देशभर में 'संसद मार्च' की तैयारी हो रही है, जिसने मोदी सरकार की प्रशासनिक विफलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

