दिल्ली हाईकोर्ट ने सफदरजंग अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट और स्वास्थ्य बुलेटिन प्रस्तुत करे, ताकि उनकी पत्नी की याचिका पर फैसला लिया जा सके जिसमें उन्हें एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की गई है। कोर्ट ने कहा है कि उनकी प्राथमिक चिंता उपवास करने वाले कार्यकर्ता की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सोनम वांगचुक, जो एक प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं, ने जलवायु परिवर्तन और लद्दाख के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए उपवास शुरू किया था। उनकी पत्नी ने दावा किया है कि उनकी सेहत बिगड़ रही है और उन्हें तत्काल चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता है।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि वह वांगचुक की सेहत की स्थिति की निगरानी करेगा और आवश्यकतानुसार आगे के निर्देश जारी करेगा। यह मामला जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया है।

वांगचुक के उपवास ने देशव्यापी ध्यान आकर्षित किया है और कई लोगों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है। उनकी पत्नी की याचिका पर कोर्ट के फैसले से वांगचुक की सेहत और उनके उपवास के उद्देश्यों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

इस बीच, वांगचुक के समर्थकों ने उनकी सेहत की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है और उन्हें तत्काल चिकित्सा ध्यान देने की मांग की है। कोर्ट के फैसले से वांगचुक की सेहत और उनके उपवास के उद्देश्यों को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।