शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में ओडिशा के कई शिक्षकों की कहानियों को सामने लाया गया है, जिनमें विशेष रूप से दृष्टिहीन शिक्षक कैलाश चंद्र साहू का उल्लेख है। जन्म से ही अंधेपन से ग्रस्त रहने के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा और गुदियाली गाँव से उच्च शिक्षा प्राप्त कर कुडुताई उप प्राथमिक विद्यालय में २०११ से पढ़ा रहे हैं। उनका अनूठा शिक्षण शैली, जिसमें ब्रेल पुस्तकों, गीतों और आकर्षक गतिविधियों का प्रयोग किया जाता है, छात्रों के बीच उन्हें अत्यंत प्रिय बनाता है।
कैलाश साहू की कहानी को पिछले समाचारों में सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान और किसानों की कठिनाइयों से जोड़ते हुए देखा जा सकता है। जैसे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एल नीनो से प्रभावित किसानों को साहस देने का आह्वान किया, वैसी ही दृढ़ता कैलाश ने अपने शारीरिक बाधा को पार कर दिखायी है। इसी प्रकार, ओडिशा के सुंदर्गढ़ में सेवानिवृत्त शिक्षकों को २० किलोमीटर की विदाई प्रक्रिया से सम्मानित किया गया, जो शिक्षकों के प्रति समाज की सराहना को दर्शाता है।
ओडिशा के भद्राक में चरीघरिया जनजातीय बस्ती में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए एक मुफ्त विद्यालय स्थापित किया गया है, जहाँ सेवानिवृत्त लेक्चरर राधारानी मोहनपात्रा और युवा सामाजिक कार्यकर्ता बिना वेतन के पढ़ाते हैं। २००९ में केवल एक छात्र से शुरू हुआ यह विद्यालय अब कक्षा प्रथम से नववीं तक लगभग पचास छात्रों को शिक्षा प्रदान करता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच महिला टी२० विश्व कप के निर्णायक मैच की तरह, इन बच्चों को भी कठिनाइयों को पार कर सफलता की ओर बढ़ना है, और यह विद्यालय उनका पहला कदम है।

