अगस्त में ब्लॉक व बुल्क डील्स का कुल मूल्य 80,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जो पिछले 14 महीनों में सबसे अधिक है। इस रिकॉर्ड स्तर को हासिल करने में घरेलू म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियाँ, पेंशन फंड और कुछ विदेशी संस्थानों ने प्रमुख भूमिका निभाई। इन संस्थागत निवेशकों ने बाजार में उपलब्ध शेयरों की बढ़ती आपूर्ति को बड़े पैमाने पर खरीदा, जिससे शेयर बाजार में तरलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
पिछले कुछ हफ्तों में भारत के वस्त्र निर्यातकों को यूके, यूरोपीय संघ और अन्य देशों के साथ नए व्यापार समझौतों से लाभ मिला है, जिससे संबंधित स्टॉक्स ने व्यापक बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया। इस सकारात्मक माहौल ने निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ाया और संस्थागत मांग को और प्रोत्साहित किया। साथ ही, बड़े शेयरधारकों ने मई‑जून में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर बेचकर लाभ उठाया, जिससे बाजार में नई खरीद‑बिक्री की गतिशीलता बनी रही।
इन सभी कारकों के मिलन से अगस्त में ब्लॉक व बुल्क डील्स का स्तर नई ऊँचाइयों पर पहुँचा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई व्यापार समझौतों की कार्यान्वयन गति बनी रही और संस्थागत निवेशकों की रुचि बनी रही, तो भविष्य में भी इस प्रकार की उच्च‑स्तरीय डील्स जारी रहने की संभावना है। हालांकि, बाजार में अचानक बदलाव या वैश्विक आर्थिक अस्थिरता से जोखिम भी बना रहता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहना आवश्यक है।
