डॉलर के अवमूल्यन की आशंकाओं के कारण उभरे बाजार के बांडों में निवेशकों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। जब वैश्विक निवेशक सुरक्षित और उच्च रिटर्न वाले विकल्पों की तलाश में होते हैं, तो ये बांड एक आकर्षक विकल्प बन जाते हैं। इस माह के शुरुआती दिनों में भारतीय वस्त्र निर्यातकों के यूके, यूरोपीय संघ और अन्य देशों के साथ नए व्यापार समझौतों ने बाजार में सकारात्मक भावना को बढ़ावा दिया, जिससे बांडों की ओर निवेश प्रवाह में वृद्धि हुई।

फंड प्रबंधकों ने कहा है कि उभरे बाजार की राजकोषीय प्रबंधन और महंगाई नियंत्रण की नीतियां उन्हें विश्वसनीय बनाती हैं। संस्थागत निवेशकों की बढ़ती मांग और ब्लॉक डील्स में बड़े शेयरधारकों द्वारा लाभ बुक करने की प्रवृत्ति ने भी इस रुझान को सुदृढ़ किया है। इसके अलावा, तेलंगाना जिम्नास्टिक्स संघ के अध्यक्ष और सांसद एम. रघुनंदन राव ने कहा कि भारत खेल के क्षेत्र में भी उभर रहा है, जिससे देश की समग्र आर्थिक छवि में सुधार हो रहा है।

उभरे बाजार के केंद्रीय बैंकों ने महंगाई लक्ष्यीकरण में अधिक अनुशासन दिखाया है, जिससे निवेशकों का विश्वास और बढ़ा है। अमेरिकी घाटे की बढ़ती चिंता के बीच, निवेशक अब डॉलर के विकल्प की तलाश में हैं, और उभरे बाजार बांड इस आवश्यकता को पूरा कर रहे हैं। भविष्य में यदि इस प्रवृत्ति को जारी रखा गया तो उभरे बाजार बांडों की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे भारतीय और विदेशी दोनों निवेशकों को लाभ हो सकता है।