बुधवार को IFCI के शेयरों में चार प्रतिशत की तीव्र गिरावट देखी गई, जब बाजार में यह सूचना फैली कि राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ की मूल्य सीमा को पहले के अनुमान से कम किया जा सकता है। इस नई कीमत बैंड में 1,700 से 1,785 रुपये तक का अंतराल शामिल है, जिससे NSE का कुल मूल्य लगभग चार लाख चालीस हजार करोड़ रुपये हो जाता है। इस बदलाव से NSE में IFCI की अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी, जो स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन के माध्यम से है, पर दबाव बढ़ गया।

इसी समय, अमेरिकी शेयर बाजार में तकनीकी और अर्धचालक शेयरों की गिरावट ने वैश्विक निवेशकों के मनोभाव को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया। अमेरिकी S&P 500 और Nasdaq दोनों ही सूचकांक में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि मेटा जैसी कंपनियों के शेयरों में कुछ उछाल देखा गया। इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय प्रवृत्तियों ने भारतीय बाजार में भी अस्थिरता को बढ़ावा दिया।

सोने की कीमतों में भी निरंतर गिरावट देखी जा रही है, जिससे निवेशकों को राहत मिली है, परन्तु यह संकेत देता है कि ब्याज दरों में और गिरावट की संभावना है। साथ ही, कारट्रेड टेक के शेयरों में नोमुरा द्वारा लक्ष्य मूल्य बढ़ाने के बाद छह प्रतिशत की उछाल देखी गई, जिससे बाजार में कुछ सकारात्मक संकेत मिले। इन सभी कारकों को मिलाकर देखा जाए तो NSE के आईपीओ की कीमत बैंड में कमी ने IFCI के शेयरों पर दबाव डाला है, जबकि वैश्विक और घरेलू बाजार की विविध घटनाएँ इस दबाव को और जटिल बना रही हैं।