जीक्यूजी पार्टनर्स ने अडानी एनर्जी सॉल्यूशन्स की हिस्सेदारी को बाजार में बेचते हुए एमएससीआई के सूचकांक पुनर्संतुलन नीलामी के दौरान बड़ी मात्रा में शेयर उपलब्ध कराए। इस अचानक आपूर्ति ने निष्क्रिय फंडों की खरीदारी को अभिभूत कर दिया, जिससे अडानी के शेयरों की कीमत में लगभग दस प्रतिशत की गिरावट आई। निवेशकों ने इस बदलाव को आश्चर्यजनक माना, क्योंकि पहले हेज फंडों ने सूचकांक‑आधारित खरीदारी की योजना बनाई थी।

पिछले कुछ हफ्तों में अडानी समूह ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जैसे कि 2030 तक पचास गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य और केरल में विजिन्जाम पोर्ट के 49 प्रतिशत हिस्से को एमएससी समूह को बेचने का प्रस्ताव। इन पहलों ने समूह की वित्तीय स्थिति और भविष्य की रणनीति पर चर्चा को तीव्र कर दिया है। साथ ही, अडानी के अमेरिकी आपराधिक मामले में उनके वकीलों ने न्यायालय से मुकदमा खारिज करने की मांग की, जिससे समूह की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी असर पड़ा है।

इन सभी पृष्ठभूमि को देखते हुए, जीक्यूजी की शेयर बिक्री ने बाजार में नई अस्थिरता का माहौल बना दिया। हेज फंडों को अब अपनी रणनीति पुनः विचारनी पड़ेगी, क्योंकि सूचकांक‑आधारित खरीदारी अब उतनी सहज नहीं रही। निवेशकों को सावधानी बरतते हुए अडानी समूह के दीर्घकालिक विकास योजनाओं और नियामक जोखिमों दोनों को ध्यान में रखना आवश्यक होगा।