पूँजी बाजार नियामक सेबी ने एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से अधिकारपत्र (पावर ऑफ अटॉर्नी) प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। इस बदलाव से पारंपरिक नोटरीकरण और अपॉस्टिल प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी, जिससे निवेशकों को ऑनबोर्डिंग में लगने वाला समय काफी घटेगा। इससे भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पूँजी का प्रवाह तेज़ होगा और निवेशकों को अधिक सुविधा मिलेगी।

पिछले कुछ हफ्तों में स्किल इंडिया डिजिटल हब ने जम्मू-कश्मीर में 80,000 से अधिक नामांकन और 17,000 से अधिक प्रमाणित डिजिटल कौशल प्राप्त किए, जिससे युवा वर्ग में एआई और डिजिटल कौशल की मांग में तेज़ी आई है। इसी संदर्भ में, विदेशी निवेशकों के लिए डिजिटल अधिकारपत्र को सरल बनाना भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहल निवेशकों को तेज़ और सुरक्षित तरीके से बाजार में प्रवेश करने में मदद करेगी।

हाल ही में हैदराबाद में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने नकली सेबी विश्लेषक के जाल में 37 लाख रुपये का नुकसान उठाया, जिससे निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है। ऐसी घटनाओं के प्रकाश में, सेबी की यह नई नीति नियामक प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ावा देती है। यह न केवल निवेशकों के भरोसे को पुनर्स्थापित करेगी, बल्कि भारतीय शेयर बाजार को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी।