वित्त मंत्रालय ने आज शुगर डीलरों के लिए भंडारण सीमा को 30 प्रतिशत तक घटा दिया, जिससे बाजार में शुगर की कीमतों में तीव्र उछाल आया। इस नीति परिवर्तन के बाद बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयरों में लगभग आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बालरामपुर चिनी और अन्य शुगर कंपनियों के शेयर भी समान गति से उभरे। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित भंडारण से डीलरों को कम मात्रा में शुगर बेचने के लिए मजबूर किया गया, जिससे कीमतें ऊपर की ओर धकेली गईं।
इस विकास को समझने के लिए पिछले कुछ हफ्तों की घटनाओं को देखना आवश्यक है। २२ जून को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत, जो पहले विश्व का दूसरा बड़ा शुगर निर्यातक था, अब कम से कम तीन मौसमी अवधि तक निर्यात के लिए पर्याप्त अधिशेष नहीं रखेगा। साथ ही, २ जुलाई को बजाज ऑटो के कुल बिक्री में २८ प्रतिशत की वृद्धि की खबर ने निवेशकों के मनोबल को बढ़ाया, जिससे बजाज समूह के शेयरों में समग्र सकारात्मक भावना बनी रही। इस सकारात्मक माहौल ने शुगर स्टॉक्स को भी लाभ पहुंचाया।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि सरकार आयात शुल्क में कटौती नहीं करती या शुगर की आपूर्ति में सुधार नहीं करती, तो कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग और ब्राज़ील से आयात में संभावित कमी ने इस उछाल को और प्रबल किया है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे शुगर स्टॉक्स में संभावित लाभ को देखते हुए सावधानीपूर्वक पोर्टफोलियो का पुनर्मूल्यांकन करें, जबकि जोखिम को भी ध्यान में रखें।
