देश में शुगर की खुदरा कीमतों में पिछले महीने से लगातार बढ़ोतरी देखी गई, जिससे बाजार में शुगर से जुड़े शेयरों में भी तेज़ी आई। 20 जुलाई को 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम से शुरू हुई कीमतें 20 अगस्त को 55.70 रुपये तक पहुँच गईं, और आजकल यह स्तर 70 रुपये के आसपास स्थिर है। इस मूल्य उछाल का मुख्य कारण मौसम में अनियमितता, विशेषकर एल नीनो की प्रभावी स्थिति और आयातित कच्चे शुगर की कमी है, जिससे घरेलू उत्पादन पर दबाव बढ़ा है।
बड़रम्पुर चिनी मिल्स, धम्पुर शुगर और उटाम शुगर मिल्स ने इस माह में अपने शेयरों में 3 से 4 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की, जबकि त्रिवेणी इंजीनियरिंग और ईआईडी पैरी भी लाभदायक रैंक में शामिल हुए। निवेशकों ने कीमतों के इस तेज़ी को देखते हुए इन कंपनियों के शेयरों में बड़ी मात्रा में खरीदारी की, जिससे बाजार में तरलता बढ़ी। इस दौरान, ओडिशा पुलिस द्वारा 25 लाख रुपये मूल्य की ब्राउन शुगर की जप्ती और एक व्यक्ति की गिरफ्तारी ने शुगर बाजार में अनियमित व्यापार के प्रति सतर्कता बढ़ा दी।
भविष्य में शुगर की कीमतों के रुझान को देखते हुए विशेषज्ञों ने कहा है कि निर्यात में कमी और मौसमी चुनौतियों के कारण कीमतें उच्च स्तर पर बनी रह सकती हैं। सरकार की नीतियों में यदि कोई राहत नहीं आती, तो शुगर कंपनियों के लाभ मार्जिन में और सुधार की संभावना है, जिससे शेयरधारकों को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे मौसमी जोखिमों और सरकारी नीतियों पर नज़र रखें, तथा दीर्घकालिक दृष्टिकोण से पोर्टफोलियो में शुगर सेक्टर को उचित हिस्सेदारी दें।
