बीआरएस के महासचिव आरएस प्रवीन कुमार ने आज राज्य के उच्च न्यायालय में जारी स्थगन आदेश पर कांग्रेस सरकार की निष्क्रियता को लेकर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कालयना लक्ष्मी और शादी मुबारक जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को रोकना न केवल गरीब परिवारों के भविष्य को खतरे में डालता है, बल्कि सरकार की विश्वसनीयता को भी धूमिल करता है। इस मुद्दे पर सरकार ने अभी तक कोई प्रतिवाद दाखिल नहीं किया, जिससे बीआरएस को लगा कि यह एक जानबूझकर की गई चूक है।
पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस सरकार पर कई अन्य मामलों में भी आलोचना की गई है। खम्माम में एक ठेकेदार ने सरकारी स्कूल के द्वार को बंद कर दिया, क्योंकि सरकार ने ११ लाख रुपये के बिलों का भुगतान नहीं किया था। इसी तरह, हरिश राव ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने रिथु भरोसा योजना के तहत किसानों को २९,३०० करोड़ रुपये का ऋण माफ़ करने का वादा तो किया, परंतु वह राशि अभी तक नहीं दी गई। इन घटनाओं ने बीआरएस के आरोपों को और भी मजबूत किया है।
बीआरएस ने सरकार से आग्रह किया कि वह तुरंत हाई कोर्ट के स्थगन आदेश को चुनौती दे और कालयना लक्ष्मी तथा शादी मुबारक योजनाओं को पुनः शुरू करे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार इस तरह की महत्वपूर्ण सामाजिक योजनाओं को टालती रही, तो जनता का भरोसा खो जाएगा और भविष्य में चुनावी परिणामों पर भी असर पड़ेगा। इस संदर्भ में बीआरएस ने कहा कि राज्य की प्रगति और जनकल्याण के लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए, न कि राजनीतिक टकराव में फँसना चाहिए।

