बिहार के लखीसराय जिले में स्थित आशोक धाम मंदिर में सवाँ महीने के पवित्र उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। जैसे ही भीड़ ने मंदिर के बाहर एकत्रित होना शुरू किया, अचानक एक इलेक्ट्रिक तार गिरा और बाड़ें ढह गईं, जिससे लोगों में घबराहट फैल गई। इस घबराहट के कारण कई लोग एक-दूसरे पर धक्का देने लगे, और अंततः धक्का‑मुक्की में सात लोगों की मौत हो गई तथा बारह से अधिक लोग घायल हुए।

स्थानीय पुलिस ने बताया कि इस भीड़भाड़ में अफवाहों का प्रसार भी प्रमुख कारण रहा। कुछ लोगों ने बताया कि अचानक ध्वनि और आवाज़ों ने उन्हें डराया, जिससे वे तेज़ी से बाहर निकलने की कोशिश में एकत्रित भीड़ पर धक्का मारने लगे। इस घटना ने धार्मिक समारोहों में सुरक्षा प्रबंधन की कमी को उजागर किया, जबकि पिछले कुछ हफ्तों में टेलंगाना के संध्या थिएटर में भीड़भाड़ के कारण समान त्रासदी घटी थी, जहाँ अभिनेता अल्लू अर्जुन को अदालत में पेश होना पड़ा।

इस हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने तुरंत आपातकालीन सहायता प्रदान की और घायल लोगों को निकटतम अस्पताल में भर्ती कराया। साथ ही, भविष्य में ऐसे धार्मिक समारोहों में भीड़ नियंत्रण, इलेक्ट्रिकल सुरक्षा और स्पष्ट सूचना प्रणाली स्थापित करने की मांग बढ़ गई है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस बात पर बल दिया है कि धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।