मारुति सुजुकी ने अपने नवीनतम एसयूवी मॉडल एफआरओएनएक्स को गुजरात के उत्पादन संयंत्र से निर्यात करना शुरू किया, और केवल अड़तीस महीनों में यह दो लाख इकाइयों की निर्यात सीमा को पार कर गया। यह गति कंपनी के पिछले इलेक्ट्रिक एसयूवी की सफलता के बाद आई, जिसने सीमित मॉडलों के बावजूद बाजार में बड़ी धूम मचा दी थी। इस उपलब्धि ने मारुति सुजुकी को भारतीय यात्री वाहन निर्यात में अग्रणी बना दिया है।
एफआरओएनएक्स का निर्यात लगभग नव्यासी देशों में हो रहा है, जिसमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई प्रमुख बाजार शामिल हैं। इस विस्तार ने न केवल कंपनी की आय में इजाफा किया, बल्कि भारत की ऑटोमोबाइल निर्यात क्षमता को भी नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया। साथ ही, यह कदम भारत के वैकल्पिक ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहन नीति के साथ सामंजस्य रखता है, क्योंकि कंपनी ने हाल ही में फ्यूल‑फ्लेक्स वैगन आर को भी लॉन्च किया था, जो इथेनॉल‑आधारित ईंधन पर चलने वाला पहला मॉडल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सने ताकाइची द्वारा उद्घाटित नई उत्पादन सुविधा ने इस तेज़ निर्यात गति को और सुदृढ़ किया है। इस सुविधा में उन्नत उत्पादन लाइन और निर्यात‑उन्मुख लॉजिस्टिक सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस प्रकार, मारुति सुजुकी ने न केवल घरेलू बाजार में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पकड़ मजबूत की है, जो भारतीय ऑटो उद्योग के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

