विदेश मंत्री एस. जैशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के ८१वें सत्र के उच्च‑स्तरीय सत्र में भारत के विदेश नीति के प्रमुख बिंदुओं को प्रस्तुत करने का संकल्प लिया है। यह सत्र ८ सितंबर से आरम्भ होकर २६ सितंबर को विशेष सत्र के रूप में आयोजित होगा, जिसमें विश्व के प्रमुख नेता भाग लेंगे। जैशंकर इस मंच से वैश्विक शांति, सतत विकास और समुद्री सुरक्षा के मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे, विशेषकर हालिया समुद्री हमलों के संदर्भ में।
जैशंकर ने पिछले महीने अमेरिकी राजनेता मारको रूबियो के साथ हुई बातचीत में तीन भारतीय नौसैनिकों की हत्या को "असंगत" कहा था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस कृत्य के लिए कड़ी निंदा करने का आग्रह किया था। अब वह इस बात को संयुक्त राष्ट्र के मंच से दोहराते हुए, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के विरुद्ध ठोस कदमों की मांग करेंगे। साथ ही, उन्होंने भारत‑अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
सत्र के दौरान सेना के नए कमान संभालने वाले जनरल धीरज सेठ और पूर्व कमानधारी जनरल उपेंद्र द्विवेदी के परिवर्तन पर भी चर्चा होगी, क्योंकि यह भारत की सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, जम्मू‑कश्मीर में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा हेतु आयोजित उच्च‑स्तरीय बैठक के परिणामों को भी उजागर किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और धार्मिक यात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इस प्रकार, जैशंकर का भाषण अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने और वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक समाधान खोजने का प्रयास होगा।

